Channels or Brands: भारत का ऑटोमोबाइल मार्केट इस समय multi-energy और multi-segment रणनीतियों के दौर से गुजर रहा है। हर बड़ा ऑटोमेकर अपने ब्रांड पोर्टफोलियो को विस्तार देने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। सवाल यह है कि – क्या कंपनी को नई sales channel शुरू करनी चाहिए या फिर नई brand identity बनानी चाहिए?
यही सवाल आज हर ऑटोमेकर के लिए सबसे बड़ा strategic dilemma बन चुका है।
आइए समझते हैं इस “Channels vs Brands” debate को विस्तार से, और जानते हैं कि भविष्य में किस रास्ते पर चलना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
Channel बनाना या Brand लॉन्च करना – मूल फर्क क्या है?
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में “Channel” का मतलब है – retail network या sales experience, यानी वह जगह और अनुभव जिसके ज़रिए ग्राहक गाड़ी खरीदता है। वहीं “Brand” का मतलब है – identity और perception, यानी ग्राहक के मन में उस कंपनी या उत्पाद की छवि।
उदाहरण के लिए –
- Maruti Suzuki के पास दो अलग-अलग चैनल हैं – Arena और Nexa, पर दोनों के प्रोडक्ट्स पर Maruti Suzuki का ही लोगो है।
- Hero MotoCorp ने अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए नया Vida brand लॉन्च किया है, जो एक अलग ब्रांड पहचान रखता है।
- Mahindra ने भी BE (Born Electric) ब्रांड बनाया है, जबकि Tata Motors ने Tata.ev नाम से अलग electric outlets शुरू किए हैं।
इन उदाहरणों से साफ है कि हर कंपनी की रणनीति अलग है – कुछ नई channel बना रही हैं, कुछ नया brand।
New Channel Strategy: Premium Experience या Confusion?
कई कंपनियाँ मानती हैं कि नया retail channel ग्राहक को बेहतर और प्रीमियम अनुभव देता है।
जैसे – Maruti Suzuki Nexa की बात करें, तो इसका मकसद था ग्राहकों को एक “premium buying experience” देना, बिना नए brand identity के।
फायदे:
- Existing brand पर भरोसा बना रहता है
- Operations और after-sales आसान रहते हैं
- Investment brand building में नहीं, customer experience में लगता है
नुकसान:
- ग्राहकों में भ्रम (confusion) बढ़ सकता है कि क्या ब्रांड अब luxury बन गया है?
- Same badge पर high-priced models को justify करना मुश्किल हो सकता है
यानी channel नया हो सकता है, पर ब्रांड पुराना होने से perception वही रहता है।
New Brand Strategy: Fresh Identity या Resource Drain?
दूसरी ओर, कुछ ऑटोमेकर्स मानते हैं कि नया brand ही असली differentiation लाता है।
उदाहरण के लिए, Hero Vida या Mahindra BE — दोनों ने नए ब्रांड के जरिए खुद को “next-gen electric mobility” के रूप में पेश किया है।
फायदे:
- नए target audience को आकर्षित करना आसान
- Product positioning स्पष्ट और futuristic लगती है
- Brand loyalty को नई दिशा मिलती है
नुकसान:
- भारी investment लगता है – branding, marketing और dealership setup में
- पुराना customer base alienate हो सकता है
- Short-term में profitability कम हो सकती है
यानी नया brand शुरू करना “high risk, high reward” रणनीति है।
Key Questions Every Automaker Should Ask
लेखक Avik Chattopadhyay के मुताबिक, किसी भी कंपनी को नया चैनल या ब्रांड लॉन्च करने से पहले दो सवाल खुद से ज़रूर पूछने चाहिए।
Question #1: क्या product इतना अलग है कि उसे नया brand चाहिए?
क्या आपकी नई कार या बाइक की DNA, personality और technology इतनी अलग है कि वह पुराने ब्रांड के साथ नहीं चल सकती?
- उदाहरण: Citroen को DS brand की जरूरत थी, क्योंकि उसका लक्ज़री DNA बिल्कुल अलग था।
- Mahindra को BE brand की ज़रूरत है क्योंकि उसका EV पोर्टफोलियो future mobility को define करेगा।
- लेकिन क्या Tata Motors को Tata.ev की ज़रूरत थी, जब वही EVs Tata showroom में बिक सकती थीं?
- क्या Hero को Vida की ज़रूरत थी, जब Electric Scooters Hero के मौजूदा नेटवर्क से बेचे जा सकते थे?
Question #2: क्या experience इतना अलग है कि उसे नया channel चाहिए?
क्या नया channel आपके core customers को दूर कर देगा?
क्या customer आपको channel से पहचानता है या brand से?
उदाहरण के लिए, ग्राहक Grand Vitara इसलिए नहीं खरीदता कि वह Nexa से मिलती है, बल्कि इसलिए क्योंकि वह Maruti Suzuki पर भरोसा करता है। इसी तरह, अगर Mahindra का M9 रेगुलर चैनल पर बिके तो क्या ग्राहक उसे avoid करेगा? शायद नहीं।
Indian Market में कौन-सी Strategy ज्यादा Effective है?
भारत में customer behavior काफी unique है।
यहां ग्राहक “channel experience” से ज़्यादा “brand trust” पर भरोसा करता है।
इसलिए, भारतीय बाजार में multi-channel strategy तो काम कर सकती है, लेकिन multi-brand strategy ज़रूरी नहीं कि हमेशा सफल हो।
- Nexa का model इसलिए सफल हुआ क्योंकि Maruti का भरोसा साथ था।
- Vida और Tata.ev को अभी लंबे समय तक brand equity बनाने में वक्त लगेगा।
भविष्य में शायद ऐसा phase आए जब EVs और ICE (Internal Combustion Engine) products पूरी तरह अलग ecosystems में चलें। लेकिन फिलहाल, brand continuity ही ग्राहक के भरोसे को मजबूत रखती है।
Expert Opinion: Balance ही सफलता की कुंजी है
एक automotive marketing expert के तौर पर, मेरा मानना है कि:
“ब्रांड वही रखें, पर उसके अंदर ‘differentiated experiences’ तैयार करें।”
इसका मतलब है –
- Technology-based differentiation (EV vs ICE)
- Experience-based differentiation (regular vs premium)
- लेकिन core brand identity एक ही रखें, ताकि brand loyalty बनी रहे।
यानी, नया channel तभी बनाइए जब उसका experience पूरी तरह अलग हो, और नया brand तभी जब उसका DNA मौजूदा identity से बिल्कुल अलग हो।
Conclusion: Channel vs Brand
आज के competitive market में, हर नई showroom या sub-brand एक बड़ा investment decision है। इसलिए blind differentiation की बजाय strategic clarity ज़रूरी है।
किसी भी कंपनी को अपने product DNA, target audience और market maturity को देखकर ही तय करना चाहिए कि उसे नया brand चाहिए या नया channel। कभी-कभी एक मजबूत brand और एक evolved retail experience ही सफलता की सबसे सरल कुंजी बन जाते हैं।
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